सत्य का आधार 1

सत्य का आधार 1

सत्य का आधार

सत्य का आधार 1

सत्य का आधार 1

सत्य का आधार लेकर ,    हम हिमालय से खड़े हैं |

शील  में औदार्य  में हम,     विश्व में सबसे बड़े हैं||

संघ की शाखा निरंतर,  शक्ति की आराधना है |

राष्ट्र की  नवचेतना के,  जागरण की साधना है ||

ध्येय  पथ पर अडिग होकर, पैर अंगद से गड़े हैं  ||1||

                                                                   सत्य का आधार लेकर, हम हिमालय से खड़े हैं |

विश्व में फहराएंगे हम,  देव संस्कृति का पताका  |

जगत को संदेश देंगे,  हिंदुओं की एकता का  |

दूर कर अवरोध सारे,  ध्येय  पथ पर हम बढे हम  हैं  ||2||

                                                                 सत्य का आधार लेकर, हम हिमालय से खड़े हैं |

जीत लें  विश्वास सब का, कर्म कौशल के सहारे |

बुद्धि – बल से नष्ट कर दें ,  शत्रु के षड्यंत्र सारे |

संगठन का मार्ग दुर्गम,  नियम संयम से चले हैं  ||3||

                                                                 सत्य का आधार लेकर, हम हिमालय से खड़े हैं |

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AAJ MANAYE RAKSHABHANDAN – 1 आज मनायें रक्षाबंधन

AAJ MANAYE RAKSHABHANDAN

AAJ MANAYE RAKSHABHANDAN – आज मनायें रक्षाबंधन

आज मनायें रक्षाबंधन  –2

अतीत से नव स्फूर्ति लेकर ,  वर्तमान में दृढ़  उधम कर,

भविष्य में  दृढ  निष्ठा रख कर, कर्मशील हम रहे निरंतर ।। 1।।

 

आज मनायें रक्षाबंधन  –2

 

बलिदानों की परंपरा से, स्वराज है यह पावन जिसमें,

वंदन उनको कृतज्ञता से, ध्येय भाव का करें जागरण ।। 2।।

 

आज मनायें रक्षाबंधन  –2

 

स्वार्थ द्वेष को आज त्याग कर,  अहंभाव का पाश काट कर,

अपना सब व्यक्तित्व भुला कर,  विराट का हम करते दर्शन  ।। 3।।

 

आज मनायें रक्षाबंधन  –2

 

अरुण केतु को साक्षी रख कर, निश्चय वाणी आज गरज कर,

शुभ कृतिका यह मंगल अवसर,  निष्ठा मन में रहे चिरंतन ।। 3।।

 

आज मनायें रक्षाबंधन  –2

AAJ MANAYE RAKSHABHANDAN

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Raksha Bandhan – Bhav Geet (रक्षा बंधन – भाव गीत) शुद्ध सात्विक प्रेम अपने,  कार्य का आधार है 1

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Raksha Bandhan – Bhav Geet भाव गीत – रक्षाबंधन

शुद्ध सात्विक प्रेम अपने,  कार्य का आधार है ।

दिव्य ऐसे प्रेम में,  ईश्वर स्वयं सकार है ।

प्रेम जो केवल समर्पण,  भाव को ही जानता है।

और उसमें ही स्वयं की,  धन्यता बस मानता है ।

राष्ट्र भर में स्नेह भरना,  साधना का सार है ।।1।।

शुद्ध सात्विक ——————————-

Raksha Bandhan – Bhav Geet (रक्षा बंधन – भाव गीत)

भारत जननी ने किया, वात्सल्य से पालन हमारा ।

है कृपा इसकी मिला यह,  प्राण तन जीवन हमारा ।

भक्ति से हम हो समर्पित, बस यही अधिकार है ।।2।।

शुद्ध सात्विक ——————————-

जाति , भाषा,  प्रांत आदि,  वर्ग  भेदों को  मिटाने।

दूर अर्थाभाव करने, तम अविद्या को हटाने ।

नित्य ज्योतिर्मय हमारा,  हृदय स्नेहागार  है ।।3।।

शुद्ध सात्विक ——————————-

कोटी आंखों से निरंतर,  आज आंसू बह रहे हैं ।

आज अगणित बंधु भगनि, यातनाएं सह रहे हैं ।

दुख हर सुख दे सभी को,  बस यही अधिकार है ।।4।।

शुद्ध सात्विक ——————————-

Raksha Bandhan – Bhav Geet (रक्षा बंधन – भाव गीत)

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