Worldwide Hypertension – 2025 WHO Report विश्व स्तर पर हाईपरटेंशन की बढ़ती समस्या: 2025 WHO रिपोर्ट

Worldwide Hypertension – 2025  WHO Report विश्व स्तर पर हाईपरटेंशन की बढ़ती समस्या: 2025 WHO रिपोर्ट का विश्लेषण

Worldwide Hypertension - 2025 WHO Report

Worldwide Hypertension – 2025 WHO Report

परिचय

हाईपरटेंशन, जिसे सामान्य भाषा में उच्च रक्तचाप कहा जाता है, आज दुनिया में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन गया है। 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (Worldwide Hypertension – 2025 WHO Report) द्वारा जारी नई रिपोर्ट ने दिखाया है कि उच्च रक्तचाप से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 1.4 अरब हो गई है। यह आंकड़ा इस बीमारी की गंभीरता और वैश्विक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इस लेख में हम Worldwide Hypertension – 2025  WHO Reort की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्षों, उच्च रक्तचाप के कारणों, जोखिमों, और नियंत्रण के उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

विश्व स्तर पर स्थिति (Worldwide Hypertension – 2025 WHO Report)

WHO की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 30 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1.4 अरब वयस्क उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। यह इस आयु वर्ग की 33% जनसंख्या के बराबर है। इनमें से केवल 20% से भी कम लोग दवाओं या जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से अपने रक्तचाप को नियंत्रित कर पाए हैं। लगभग 600 मिलियन लोग (44%) इस बीमारी के बारे में जानते ही नहीं हैं।

उच्च रक्तचाप से संबंधित हृदय रोगों और स्ट्रोक के कारण विकसित और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी प्रभाव पड़ा है। 2011 से 2025 तक, इसके कारण निम्न और मध्य-आय वाले देशों को अनुमानित रूप से 3.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। यह संख्या केवल वित्तीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य परिदृश्य पर भी गंभीर प्रभाव डालती है।

हाईपरटेंशन के कारण

उच्च रक्तचाप के पीछे कई कारण हैं।Worldwide Hypertension – 2025 WHO Report के अनुसार, प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

  1. अस्वास्थ्यकर आहार: नमक और प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक सेवन रक्तचाप को बढ़ाता है।
  2. शारीरिक निष्क्रियता: बैठने की जीवनशैली और व्यायाम की कमी हृदय और रक्त वाहिकाओं को कमजोर करती है।
  3. मोटापा: अत्यधिक वजन और पेट की चर्बी रक्तचाप को प्रभावित करती है।
  4. तनाव और मानसिक दबाव: लगातार मानसिक तनाव हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है।
  5. तंबाकू और शराब का सेवन: ये आदतें रक्तचाप बढ़ाने में सीधे योगदान देती हैं।
  6. अनुवांशिक कारण: परिवार में हाईपरटेंशन के इतिहास होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
  7. पर्यावरणीय कारक: प्रदूषण और अन्य बाहरी कारक भी इस समस्या में योगदान करते हैं।

भारत में स्थिति

भारत में उच्च रक्तचाप की समस्या तेजी से बढ़ रही है। शहरीकरण, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, तनावपूर्ण कार्य जीवन और आहार की आदतें प्रमुख कारण हैं। भारत सहित निम्न और मध्य-आय वाले देशों में उच्च रक्तचाप का नियंत्रण और जागरूकता कम होने के कारण इसके प्रभाव अधिक गंभीर होते हैं।

उच्च रक्तचाप के जोखिम (Worldwide Hypertension – 2025  WHO Report)

उच्च रक्तचाप कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, जैसे:

  • हृदय रोग और दिल का दौरा
  • स्ट्रोक
  • गुर्दे की बीमारी
  • दृष्टि में समस्या
  • मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव

उच्च रक्तचाप को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

नियंत्रण और रोकथाम

WHO ने उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय सुझाए हैं:

  1. नियमित जांच: समय-समय पर रक्तचाप की जांच करवाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  2. स्वस्थ आहार: कम नमक, संतुलित पोषण, फल और सब्जियों का अधिक सेवन।
  3. नियमित व्यायाम: सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम जैसे तेज़ चलना, साइक्लिंग, या तैराकी।
  4. तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान और पर्याप्त नींद तनाव कम करने में मदद करती है।
  5. मदिरा और तंबाकू से परहेज़: इनका सेवन रक्तचाप को बढ़ाता है।
  6. वजन नियंत्रण: संतुलित वजन बनाए रखना रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।

जीवनशैली सुधार और शिक्षा

WHO का सुझाव है कि उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए केवल दवा पर निर्भर न रहकर जीवनशैली में सुधार की आवश्यकता है। समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रम, आहार शिक्षा, और फिटनेस को बढ़ावा देना आवश्यक है। सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों को मिलकर लोगों तक जानकारी पहुँचाने और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

तकनीकी उपाय और नवाचार

तकनीकी क्षेत्र में भी उच्च रक्तचाप के नियंत्रण के लिए कई नवाचार हुए हैं। स्मार्ट वॉच और फिटनेस ट्रैकर अब रक्तचाप और हृदय गति की निगरानी कर सकते हैं। मोबाइल एप्स और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म लोगों को आहार, व्यायाम और तनाव प्रबंधन में सहायता कर रहे हैं। ये तकनीकें उच्च रक्तचाप की रोकथाम और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

निष्कर्ष

2025 में WHO की रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उच्च रक्तचाप एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इसे नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में बदलाव, नियमित जांच, और शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत और अन्य विकासशील देशों में इसके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकारी नीतियों, स्वास्थ्य सेवाओं, और जन जागरूकता अभियानों का सहयोग आवश्यक है।

स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखकर हम इस ‘साइलेंट किलर’ को नियंत्रित कर सकते हैं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं।

https://billrothhospitals.com/world-hypertension-day-2025/#:~:text=World%20Hypertension%20Day%202025%20Theme,to%20a%20longer%2C%20healthier%20life.

https://www.who.int/campaigns/world-health-day/2025

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Heart Health Tips in Hindi मुंह की गंदगी से हार्ट अटैक तक: क्यों और कैसे जुड़ा है आपका ओरल हेल्थ और हृदय रोगों का रिश्ता? |

Heart Health Tips in Hindi

Heart Health Tips in Hindi मुंह की गंदगी से हार्ट अटैक तक: क्यों और कैसे जुड़ा है आपका ओरल हेल्थ और हृदय रोगों का रिश्ता? |

हम सभी जानते हैं कि दांत और मसूड़े (Heart Health Tips in Hindi) हमारे खाने-पीने और बोलने के लिए कितने ज़रूरी हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके मुंह की छोटी-सी लापरवाही भी आपके दिल की धड़कनों के लिए खतरनाक हो सकती है?
आधुनिक शोध बताते हैं कि ओरल हेल्थ (Oral Health) और कार्डियक हेल्थ (Cardiac Health) आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। मुंह की गंदगी से पैदा होने वाले बैक्टीरिया सीधे खून में घुसकर दिल की धमनियों तक पहुँचते हैं और वहीं से शुरू होती है हार्ट अटैक की कड़ी।


क्यों जुड़ा है मुंह की गंदगी और हृदय रोगों का गहरा रिश्ता? (Heart Health Tips in Hindi)

1. बैक्टीरिया और रक्त प्रवाह

मसूड़ों की बीमारी (Periodontal Disease) में जब सूजन या पायरिया होता है, तो लाखों बैक्टीरिया आसानी से रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं। यह बैक्टीरिया खून की धमनियों की परत (Endothelium) को प्रभावित करते हैं और उसमें सूजन पैदा कर देते हैं।

2. धमनियों का कठोर होना (Atherosclerosis)

संक्रमण के कारण धमनियों की भीतरी दीवार पर प्लाक जमना शुरू हो जाता है। यह प्लाक चर्बी, कोलेस्ट्रॉल और बैक्टीरिया के मेल से बनता है। धीरे-धीरे नसें कठोर हो जाती हैं और खून का प्रवाह बाधित होने लगता है।

Heart Health Tips in Hindi

Heart Health Tips in Hindi

3. सूजन का दुष्चक्र

लगातार मसूड़ों की सूजन शरीर में क्रोनिक इंफ्लेमेशन को जन्म देती है। क्रोनिक इंफ्लेमेशन वही अदृश्य दुश्मन है जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बड़ा कारण बनता है।


शोध क्या कहते हैं? (Heart Health Tips in Hindi)

  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, जिन लोगों को मसूड़ों की गंभीर बीमारी होती है उनमें हार्ट अटैक का रिस्क 20% अधिक पाया गया है।

  • ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग दिन में 2 बार ब्रश नहीं करते, उनमें हार्ट प्रॉब्लम का खतरा कहीं अधिक होता है।

  • भारत में भी कार्डियोलॉजिस्ट अब “ओरल हेल्थ चेकअप” को हार्ट पेशेंट्स के लिए ज़रूरी मानने लगे हैं।


मुंह की बीमारी के चेतावनी संकेत (Heart Health Tips in Hindi)

  • मसूड़ों से बार-बार खून आना

  • दांतों का ढीला होना या हिलना

  • लगातार बदबू आना

  • मसूड़ों का लाल या नीला पड़ जाना

  • मुंह में बार-बार छाले या फोड़े

ये संकेत केवल दांतों की परेशानी नहीं, बल्कि दिल की संभावित समस्या का भी संकेत हो सकते हैं।


हृदय को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

1. ओरल हेल्थ के लिए (Heart Health Tips in Hindi)

  • दिन में दो बार 2 मिनट तक सही तरीके से ब्रश करें।

  • हर भोजन के बाद कुल्ला करने की आदत डालें।

  • फ्लॉसिंग और माउथवॉश का उपयोग करें।

  • समय-समय पर डेंटिस्ट से जांच करवाएँ।

2. हृदय की सेहत के लिए

  • धूम्रपान और तंबाकू पूरी तरह छोड़ दें।

  • रोज़ाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें।

  • संतुलित भोजन लें — फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज और कम वसा वाला भोजन।

  • नमक और शुगर की मात्रा सीमित रखें।

  • तनाव कम करने के लिए ध्यान और योग करें।

3. मेडिकल जांच

  • हर 6-12 महीने में ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएँ।

  • परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो विशेष सतर्कता रखें।


क्यों ज़रूरी है यह जानकारी?

दिल का दौरा अचानक नहीं आता। यह धीरे-धीरे हमारे जीवनशैली और आदतों से जुड़ता है।

  • अगर आप मुंह की सफाई की उपेक्षा करते हैं, तो आप अनजाने में दिल की धड़कनों को खतरे में डाल रहे हैं।

  • अगर आप दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखते हैं, तो आप न सिर्फ आत्मविश्वास भरी मुस्कान पाते हैं बल्कि दिल को भी लंबी उम्र देते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या मसूड़ों से खून आना हार्ट अटैक का शुरुआती लक्षण है?
उत्तर: यह सीधे हार्ट अटैक का लक्षण नहीं, लेकिन गंभीर ओरल इंफेक्शन का संकेत है जो हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है।

प्रश्न 2: क्या केवल ब्रश करना ही पर्याप्त है?
उत्तर: नहीं, फ्लॉसिंग और नियमित डेंटल चेकअप भी ज़रूरी हैं।

प्रश्न 3: क्या हर मसूड़ों की बीमारी से हार्ट प्रॉब्लम होती है?
उत्तर: हर मामले में नहीं, लेकिन लंबे समय तक इग्नोर करने से रिस्क कई गुना बढ़ जाता है।

प्रश्न 4: क्या हेल्दी डाइट हार्ट और ओरल हेल्थ दोनों को बचा सकती है?
उत्तर: बिल्कुल। फल, सब्जियाँ, फाइबर और पानी दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद हैं।


निष्कर्ष

मुंह की गंदगी को कभी हल्के में न लें। यह केवल आपकी मुस्कान और आत्मविश्वास नहीं बिगाड़ती बल्कि आपके दिल की धड़कनों के लिए भी खतरा बन सकती है।
याद रखिए —
👉 साफ दाँत और मसूड़े = मजबूत दिल और लंबी उम्र।

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rozana 15 minute rassi koodne ke फायदे रोज़ाना 15 मिनट रस्सी कूदने के अद्भुत फायदे – फिटनेस, इम्युनिटी और मानसिक स्वास्थ्य rozana15 minute rassi koodne ke fayde

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rozana 15 minute rassi koodne ke रोज़ाना 15 मिनट रस्सी कूदने के फायदे – फिटनेस, इम्युनिटी और मानसिक स्वास्थ्य

rozana 15 minute rassi koodne ke रोज़ाना सिर्फ 15 मिनट रस्सी कूदने के मिलते हैं ढेरों फायदे

आज के व्यस्त जीवन में फिट और हेल्दी रहना एक बड़ी चुनौती बन गया है। जिम जाना, लंबे समय तक वर्कआउट करना या अलग-अलग फिटनेस प्रोग्राम्स को फॉलो करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में यदि कोई सरल और प्रभावी एक्सरसाइज हो जो कम समय में अधिक फायदा दे, तो वह सभी के लिए वरदान साबित हो सकती है। रोज़ाना सिर्फ 15 मिनट रस्सी कूदना ऐसी ही एक सरल, कम खर्चीली और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध एक्सरसाइज है।


1. रस्सी कूदना – एक एरोबिक एक्सरसाइज

rozana 15 minute rassi koodne ke रस्सी कूदना एक एरोबिक या कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज है। एरोबिक एक्सरसाइज वह होती है जिसमें हृदय और फेफड़ों की गति बढ़ती है और मांसपेशियों में ऑक्सीजन की आपूर्ति तेज होती है। शोध बताते हैं कि कार्डियो एक्सरसाइज हृदय की कार्यक्षमता, फेफड़ों की क्षमता और पूरे शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है।

15 मिनट की रस्सी कूदने की सत्र में आप औसतन 150-200 कैलोरी बर्न कर सकते हैं। यह बर्निंग क्षमता आपकी बॉडी वेट, उम्र और कूदने की गति पर निर्भर करती है।


2. फिजिकल फिटनेस और मेटाबॉलिज़्म

रस्सी कूदना शरीर के कई हिस्सों की मांसपेशियों को एक्टिव करता है – पैर, टखने, घुटने, कंधे और पेट की मसल्स। यह मसल्स की टोनिंग में मदद करता है और शारीरिक शक्ति बढ़ाता है।

साथ ही, नियमित रस्सी कूदने से मेटाबॉलिज़्म तेज होता है। तेज मेटाबॉलिज़्म का मतलब है कि शरीर भोजन से अधिक कैलोरी जलाएगा और फैट कम होगा। यह वजन नियंत्रण और बॉडी फैट घटाने के लिए बेहद फायदेमंद है।


3.rozana 15 minute rassi koodne ke हृदय स्वास्थ्य और ब्लड सर्कुलेशन 

रस्सी कूदना एक कार्डियो एक्सरसाइज है, इसलिए यह हृदय स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। रोज़ाना 15 मिनट की साधारण रस्सी कूदने की प्रैक्टिस:

  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती है

  • कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखती है

  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करती है

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की रिपोर्ट के अनुसार, कम समय की उच्च-इंटेंसिटी कार्डियो एक्सरसाइज भी लंबे समय तक चलने वाले स्वास्थ्य लाभ दे सकती है।


rozana15 minute rassi koodne ke fayde

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4. मेंटल हेल्थ पर असर

शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है। रस्सी कूदने से एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जिसे “हैप्पी हार्मोन” भी कहा जाता है। एंडोर्फिन तनाव कम करता है, मूड को बेहतर बनाता है और डिप्रेशन व एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याओं में राहत देता है।

इसके अलावा, नियमित फिजिकल एक्टिविटी से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य और भी मजबूत होता है।


5. स्टैमिना और स्ट्रेंथ बढ़ाना

रस्सी कूदने से पैरों, टखनों और कंधों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इससे शारीरिक स्टैमिना और सहनशक्ति बढ़ती है। लंबे समय तक एक्टिव रहने, खेल-कूद और रोजमर्रा की गतिविधियों में यह काफी मददगार है।


6. को-ऑर्डिनेशन और बैलेंस

रस्सी कूदते समय हाथ और पैर की गति को सही समय पर संतुलित करना पड़ता है। यह मांसपेशियों और मस्तिष्क के बीच बेहतर को-ऑर्डिनेशन विकसित करता है। बैलेंस और रिफ्लेक्स सुधारने में भी यह मदद करता है।


7. वजन घटाने में मदद 

यदि आपका उद्देश्य वजन कम करना है, तो रस्सी कूदना rozana15 minute rassi koodne ke fayde बेहतरीन विकल्प है। हाई इंटेंसिटी रस्सी कूदने की प्रैक्टिस फैट बर्न करती है, बॉडी टोनिंग करती है और मेटाबॉलिज़्म को तेज करती है। इसके नियमित अभ्यास से कम समय में भी प्रभावशाली परिणाम मिल सकते हैं।


8. इम्युनिटी बूस्ट

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नियमित फिजिकल एक्टिविटी से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। रोज़ाना रस्सी कूदना शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इससे सर्दी, खांसी और वायरल इंफेक्शन से लड़ने में मदद मिलती है।


9. सुलभ और सस्ता एक्सरसाइज विकल्प

रस्सी कूदने के लिए महंगे जिम या उपकरणों की जरूरत नहीं होती। बस एक रस्सी और थोड़ी जगह की आवश्यकता होती है। इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है और यह समय व पैसे दोनों की बचत करता है।


10. सुरक्षा और सुझाव

  • शुरुआत में धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ।

  • आरामदायक जूते पहनें और सपाट सतह पर कूदें।

  • अगर घुटनों या टखनों में चोट है तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।


निष्कर्ष

रोज़ाना सिर्फ 15 मिनट रस्सी कूदना न केवल फिजिकल फिटनेस बढ़ाता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और इम्युनिटी को भी मजबूत बनाता है। यह आसान, सस्ता और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित एक्सरसाइज है। अगर आप इसे अपनी डेली रूटीन में शामिल करते हैं, तो जल्द ही इसके अद्भुत लाभ महसूस करेंगे। इस रस्सी कूद से आपको अद्भुत फायदे मिलने वाले हैं ।

इस छोटे समय में की गई साधारण एक्सरसाइज आपके जीवन को स्वस्थ, लंबा और ऊर्जा से भरपूर बना सकती है।

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60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स 1 Health Tips

60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स 1Health Tips

60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स 1 Health Tips

🌿 60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स

👉 उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ज़रूरतें बदल जाती हैं। 60 साल के बाद हड्डियाँ कमज़ोर होने लगती हैं, पाचन धीमा हो जाता है और इम्यूनिटी भी घटने लगती है। ऐसे समय में सही डाइट आपको एक्टिव, फिट और एनर्जेटिक बनाए रख सकती है।

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कौन-से 8 घरेलू फूड्स 60 साल के बाद ज़रूर खाने चाहिए।


1. 🥛 दूध और दही (Milk & Curd) 60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स 1 Health Tips

  • हड्डियों और दांतों को मज़बूत करने के लिए सबसे अच्छा स्रोत।

  • कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर।

  • रोज़ाना 1-2 गिलास दूध या 1 कटोरी दही ज़रूर लें।

  • 60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स Health Tips

    60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स Health Tips


2. 🌿 हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (Leafy Greens)

  • पालक, मेथी, सरसों में आयरन और फोलेट होता है।

  • पाचन सही रखती हैं और खून की कमी दूर करती हैं।

  • हफ्ते में कम से कम 3–4 बार डाइट में शामिल करें।


3. 🍎 ताज़े फल (Fruits) 60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स 1 Health Tips

  • सेब, केला, पपीता, संतरा — फाइबर और विटामिन C से भरपूर।

  • इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाते हैं।

  • रोज़ 2–3 फल खाने की आदत डालें।


4. 🥣 दाल और चना (Pulses & Chickpeas)

  • प्रोटीन का बढ़िया स्रोत, मांसपेशियों को मज़बूत करता है।

  • बुजुर्गों में कमजोरी और थकान को दूर करता है।

  • रोज़ाना 1 कटोरी दाल या उबला चना ज़रूर खाएँ।


5. 🥜 सूखे मेवे (Dry Fruits)

  • बादाम, अखरोट, किशमिश में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है।

  • दिमाग़ और दिल को स्वस्थ रखते हैं।

  • सुबह भीगे हुए 4-5 बादाम, 1 अखरोट और 1 चम्मच किशमिश खाएँ।


6. 🌼 हल्दी (Turmeric)

  • एंटी-इंफ्लेमेट्री और एंटी-बैक्टीरियल गुण।

  • जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत।

  • दूध में हल्दी डालकर रात को पीना बेहद फायदेमंद।


7. 🧄 अदरक और लहसुन (Ginger & Garlic)

  • दिल की बीमारियों से बचाव।

  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित।

  • सुबह खाली पेट 1–2 लहसुन की कलियाँ या अदरक वाली चाय पी सकते हैं।


8. 🌾 अनाज (Whole Grains)

  • ज्वार, बाजरा, ओट्स, ब्राउन राइस — पाचन के लिए अच्छे।

  • डायबिटीज और मोटापे से बचाव।

  • रोज़ की डाइट में कम से कम 1 बार ज़रूर शामिल करें।

  • 60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स | Health Tips

60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स 1Health Tips

60 साल के बाद सेहत के लिए 8 ज़रूरी फूड्स 1Health Tips

🧾 निष्कर्ष (Conclusion)

60 साल की उम्र के बाद सेहत का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। अगर आप इन 8 घरेलू फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो न सिर्फ़ बीमारियों से बचेंगे बल्कि हमेशा एक्टिव और फिट महसूस करेंगे।

👉 याद रखें: संतुलित आहार + हल्की कसरत + पॉज़िटिव सोच = लंबी और स्वस्थ ज़िंदगी।

हमारी ये रचनाए भी देखें :-

https://fitnesswellness2.com/

https://www.youtube.com/@murariprasad2

सत्य का आधार 1

सत्य का आधार 1

सत्य का आधार

सत्य का आधार 1

सत्य का आधार 1

सत्य का आधार लेकर ,    हम हिमालय से खड़े हैं |

शील  में औदार्य  में हम,     विश्व में सबसे बड़े हैं||

संघ की शाखा निरंतर,  शक्ति की आराधना है |

राष्ट्र की  नवचेतना के,  जागरण की साधना है ||

ध्येय  पथ पर अडिग होकर, पैर अंगद से गड़े हैं  ||1||

                                                                   सत्य का आधार लेकर, हम हिमालय से खड़े हैं |

विश्व में फहराएंगे हम,  देव संस्कृति का पताका  |

जगत को संदेश देंगे,  हिंदुओं की एकता का  |

दूर कर अवरोध सारे,  ध्येय  पथ पर हम बढे हम  हैं  ||2||

                                                                 सत्य का आधार लेकर, हम हिमालय से खड़े हैं |

जीत लें  विश्वास सब का, कर्म कौशल के सहारे |

बुद्धि – बल से नष्ट कर दें ,  शत्रु के षड्यंत्र सारे |

संगठन का मार्ग दुर्गम,  नियम संयम से चले हैं  ||3||

                                                                 सत्य का आधार लेकर, हम हिमालय से खड़े हैं |

https://www.youtube.com/@murariprasad2/featured

https://fitnesswellness2.com/category/sangh-geet/

 

संस्कार क्या है 1

संस्कार क्या है

संस्कार क्या है (sanskar-kiya-hai)

एक राजा के पास सुन्दर घोड़ी थी। कई बार युद्व में इस घोड़ी ने राजा के प्राण बचाये और घोड़ी राजा के लिए पूरी वफादार थीI कुछ दिनों के बाद इस घोड़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया, बच्चा काना पैदा हुआ, पर शरीर हष्ट पुष्ट व सुडौल था।

बच्चा बड़ा हुआ, बच्चे ने मां से पूछा: मां मैं बहुत बलवान हूँ, पर काना हूँ…. यह कैसे हो गया, इस पर घोड़ी बोली: “बेटा जब में गर्भवती थी, तू पेट में था तब राजा ने मेरे ऊपर सवारी करते समय मुझे एक कोड़ा मार दिया, जिसके कारण तू काना हो गया।

यह बात सुनकर बच्चे को राजा पर गुस्सा आया और मां से बोला: “मां मैं इसका बदला लूंगा।”

मां ने कहा “राजा ने हमारा पालन-पोषण किया है, तू जो स्वस्थ है….सुन्दर है, उसी के पोषण से तो है, यदि राजा को एक बार गुस्सा आ गया तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम उसे क्षति पहुचाये”, पर उस बच्चे के समझ में कुछ नहीं आया, उसने मन ही मन राजा से बदला लेने की सोच ली।

एक दिन यह मौका घोड़े को मिल गया राजा उसे युद्व पर ले गया । युद्व लड़ते-लड़ते राजा एक जगह घायल हो गया, घोड़ा उसे तुरन्त उठाकर वापस महल ले आया।

संस्कार क्या है (sanskar-kiya-hai)

इस पर घोड़े को ताज्जुब हुआ और मां से पूछा: “मां आज राजा से बदला लेने का अच्छा मौका था, पर युद्व के मैदान में बदला लेने का ख्याल ही नहीं आया और न ही ले पाया, मन ने गवारा नहीं किया….इस पर घोडी हंस कर बोली: बेटा तेरे खून में और तेरे संस्कार में धोखा है ही नहीं, तू जानकर तो धोखा दे ही नहीं सकता है।”

“तुझ से नमक हरामी हो नहीं सकती, क्योंकि तेरी नस्ल में तेरी मां का ही तो अंश है।”

संस्कार क्या है (sanskar-kiya-hai)

यह सत्य है कि जैसे हमारे संस्कार होते है, वैसा ही हमारे मन का व्यवहार होता है, हमारे पारिवारिक-संस्कार अवचेतन मस्तिष्क में गहरे बैठ जाते हैं, माता-पिता जिस संस्कार के होते हैं, उनके बच्चे भी उसी संस्कारों को लेकर पैदा होते हैं।

संस्कार क्या है (sanskar-kiya-hai)

*हमारे कर्म ही ‘संस्‍कार’ बनते हैं और संस्कार ही प्रारब्धों का रूप लेते हैं! यदि हम कर्मों को सही व बेहतर दिशा दे दें तो संस्कार अच्छे बनेगें और संस्कार अच्छे बनेंगे तो जो प्रारब्ध का फल बनेगा, वह मीठा व स्वादिष्ट होगा।

संस्कार क्या है

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आखिरी पड़ाव -1

आखिरी-पड़ाव

आखिरी पड़ाव  (akhiari-padaw)

कई बार लक्ष्य नजरों के सामने होते हुए भी हम लक्ष्य तक नही पहुँच पाते है! ऐसा क्यों?_

आखिरी पड़ाव (akhiari-padaw)

सुंदरबन इलाके में रहने वाले ग्रामीणों पर हर समय जंगली जानवरों का खतरा बना रहता था। खास तौर पर जो युवक घने जंगलों में लकड़ियाँ चुनने व शहद इकट्ठा करने जाते थे, उन पर कभी भी बाघ हमला कर सकते थे। यही वजह थी कि वे सब पेड़ों पर तेजी से चढ़ने-उतरने का प्रशिक्षण लिया करते थे।

प्रशिक्षण गाँव के ही एक बुजुर्ग दिया करते थे, जो अपने समय में इस कला के महारथी माने जाते थे। आदरपूर्वक सब उन्हें बाबा-बाबा कह कर पुकारा करते थे।

बाबा कुछ महीनों से युवाओं के एक समूह को पेड़ों पर तेजी से चढ़ने-उतरने की बारीकियाँ सिखा रहे थे और आज उनके प्रशिक्षण का आखिरी दिन था।

बाबा बोले, “आज आपके प्रशिक्षण का आखिरी दिन है, मैं चाहता हूँ, आप सब एक-एक कर इस चिकने और लम्बे पेड़ पर तेजी से चढ़ कर और उतर कर दिखाएँ।” सभी युवक अपना कौशल दिखाने के लिए तैयार हो गए।

पहले युवक ने तेजी से पेड़ पर चढ़ना शुरू किया और देखते ही देखते पेड़ की सबसे ऊँची शाखा पर पहुँच गया। फिर उसने उतरना शुरू किया। जब वह लगभग आधा उतर आया तो बाबा बोले, “सावधान, ज़रा संभल कर। आराम से उतरो, क़ोइ जल्दबाजी नहीं….।” युवक सावधानी पूर्वक नीचे उतर आया।

इसी तरह बाकी युवक भी पेड़ पर चढ़े और उतरे और हर बार बाबा आधा उतरने के बाद उन्हें सावधान रहने को कहते।

यह बात युवकों को कुछ अजीब लगी, और उन्ही में से एक ने पुछा, “बाबा, हमें आपकी एक बात समझ में नहीं आई, पेड़ का सबसे कठिन हिस्सा तो एकदम ऊपर वाला था, जहाँ पे चढ़ना और उतरना दोनों ही बहुत कठिन था, आपने तब हमें सावधान होने के लिए नहीं कहा, लेकिन जब हम पेड़ का आधा हिस्सा उतर आये और बाकी हिस्सा उतरना बिलकुल आसान था तभी आपने हर बार हमें सावधान होने के निर्देश क्यों दिये?”

बाबा मुस्कराये, और फिर बोले, “बेटे ! यह तो हम सब जानते हैं कि ऊपर का हिस्सा सबसे कठिन होता है, इसलिए वहाँ पर हम सब खुद ही सतर्क हो जाते हैं और पूरी सावधानी बरतते हैं। लेकिन जब हम अपने लक्ष्य के समीप आखिरी पड़ाव (akhiari-padaw) पहुँचने लगते हैं तो वह हमें बहुत ही सरल लगने लगता है….

हम जोश में होते हैं और अति आत्मविश्वास से भर जाते हैं। इसी समय सबसे अधिक गलती होने की सम्भावना होती है। यही कारण है कि मैंने तुम लोगों को आधा पेड़ उतर आने के पश्चात सावधान किया ताकि तुम अपनी मंजिल के निकट आकर आखिरी पड़ाव (akhiari-padaw)  पर कोई गलती न कर बैठो!“

सभी युवक बाबा की बात सुनकर शांत हो गए, आज उन्हें एक बहुत बड़ी सीख मिल चुकी थी।

मित्रों, सफल होने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना बहुत ही जरूरी है, और यह भी बहुत ज़रूरी है कि जब हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के करीब पहुँच जाएँ, मंजिल को सामने पायें, तो उस समय भी पूरे धैर्य के साथ अपना कदम आगे बढ़ाएँ।

कई बार हम लक्ष्य के निकट पहुँच कर अपना धैर्य खो देते हैं और गलतियाँ कर बैठते हैं, जिस कारण हम अपने लक्ष्य से चूक जाते हैं। इसलिए लक्ष्य के आखिरी पड़ाव पर पहुँच कर भी किसी तरह की असावधानी नहीं बरतनी चाहिए और लक्ष्य प्राप्त कर के ही दम ले।

प्रेरक : अधिकतर लोग सफलता के इसी घडी में अपने कार्य को संभाल नहीं पता है और असफलता के दल दल में फस जाते हैं।

आखिरी पड़ाव

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गेहूं है की तोंद

गेहूं है की तोंद

गेहूं है की तोंद

Side Effects Of Wheet

गेहूं की विशेषता।

*गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है अमेरिका के एक हृदय रोग विशेषज्ञ हैं डॉ विलियम डेविस…उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी 2011 में जिसका नाम था “Wheat belly गेंहू की तोंद”…

यह पुस्तक अब फूड हेबिट पर लिखी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक बन गई है…पूरे अमेरिका में इन दिनों गेंहू को त्यागने का अभियान चल रहा है…कल यह अभियान यूरोप होते हुये भारत भी आएगा*

यह पुस्तक ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं और कोई फ़्री में पढ़ना चाहे तो भी मिल सकती है, चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ डेविस का कहना है कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया को अगर मोटापे, डायबिटिज और हृदय रोगों से स्थाई मुक्ति चाहिए तो उन्हें पुराने भारतीयों की तरह ज्वार, बाजरा, रागी, चना, मक्का मटर, कोदरा, जो, सावां, कांगनी ही खाना चाहिये गेंहू नहीं जबकि यहां भारत का हाल यह है कि 1980 के बाद से लगातार सुबह शाम गेंहू खा खाकर हम महज 40 वर्षों में मोटापे और डायबिटिज के मामले में दुनिया की राजधानी बन चुके हैं…।

गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है. यह मध्य एशिया और अमेरिका की फसल मानी जाती है और आक्रांताओ के भारत आने के साथ यह अनाज भारत आया था…उससे पहले भारत में जौ की रोटी बहुत लोकप्रिय थी और मौसम अनुसार मक्का, बाजरा, ज्वार आदि…भारतीयों के मांगलिक कार्यों में भी जौ अथवा चावल (अक्षत) ही चढाए जाते रहे हैं। प्राचीन ग्रंथों में भी इन्हीं दोनों अनाजों का अधिकतम जगहों पर उल्लेख है..हमारे पिताजी,दादाजी, कहते थे कि 1975-80 तक भी आम भारतीय घरों में *बेजड़ (मिक्स अनाज, Multigrain) की रोटी का प्रचलन था जो धीरे धीरे खतम हो गया।

गेहूं है की तोंद

1980 के पहले आम तौर पर घरों में मेहमान आने या दामाद के आने पर ही गेंहू ( की रोटी बनती थी और उस पर घी लगाया जाता था, अन्यथा बेजड़ की ही रोटी बनती थी ……आज घरवाले उसी बेजड़ की रोटी को चोखी ढाणी में खाकर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं….।

हम अक्सर अपने ही परिवारों में बुजुर्गों के लम्बी दूरी पैदल चल सकने, तैरने, दौड़ने, सुदीर्घ जीने, स्वस्थ रहने के किस्से सुनते हैं। वे सब मोटा अनाज ही खाते थे गेंहू नहीं।एक पीढ़ी पहले किसी का मोटा होना आश्चर्य की बात होती थी, आज 77 प्रतिशत भारतीय ओवरवेट हैं और यह तब है जब इतने ही प्रतिशत भारतीय कुपोषित भी हैं…फ़िर भी 30 पार का हर दूसरा भारतीय अपनी तौंद घटाना चाहता है….।

गेहूं है की तोंद

गेंहू की लोच ही उसे आधुनिक भारत में लोकप्रिय बनाये हुये है क्योंकि इसकी रोटी कम समय और कम आग में आसानी से बन जाती है…पर यह अनाज उतनी आसानी से पचता नहीं है…समय आ गया है कि भारतीयों को अपनी रसोई में 80-90 प्रतिशत अनाज जौ, ज्वार, बाजरे, रागी, मटर, चना, रामदाना आदि को रखना चाहिये और 10-20 प्रतिशत गेंहू को…

हाल ही कोरोना ने जिन एक लाख लोगों को भारत में लीला है उनमें से डायबिटिज वाले लोगों का प्रतिशत 70 के करीब है…वाकई गेहूं त्यागना ही पड़ेगा…. अन्त में एक बात और भारत के फिटनेस आइकन 54 वर्षीय टॉल डार्क हेंडसम (TDH) मिलिंद सोमन गेंहू नहीं खाते हैं….

मात्र बीते 40 बरसों में यह हाल हो गया है तो अब भी नहीं चेतोगे फ़िर अगली पीढ़ी के बच्चे डायबिटिज लेकर ही पैदा होंगे…शेष- समझदार को इशारा ही काफी है।

डायबिटीज से निजात पाने के लिए आप मल्टीग्रैन खा सकते हैं जिसमे जौ, चना , ज्वार, बाजरा , अलसी, सोयाबीन, मक्का, रागी, गेहूं कम मात्रा में डालकर खा सकते है जिससे आप बिविन्न प्रकार के विटामिन और खनिज प्राप्त हो सकता है ।  स्वस्थ्य रहने के लिए हमें पुराने मोटा अनाज को ही अपनाना पड़ेगा ।

गेहूं है की तोंद

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श्री हनुमान चलीसा 1

श्री हनुमान चलीसा

श्री हनुमान चलीसा

|| श्री हनुमान चालीसा ||

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि । 
बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि ।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।

॥ चौपाई  श्री हनुमान चलीसा ॥

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

रामदूत अतुलित बलधामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा विराजे।
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना॥

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक ते काँपै॥

भूत पिशाच निकट नहीं आवै।
महावीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा॥

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जन्म जन्म के दुख बिसरावै॥

अंतकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

॥ दोहा श्री हनुमान चलीसा ॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप॥

|| सियाराम चंद्र की जय ||

|| पवन सूत हनुमान की जय ||

|| उमापति महादेव की जय ||

|| बोलो रे भाई सब संतन की जय ||

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श्री हनुमान चलीसा

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मनुष्य की सम्पन्नता या यंत्रो के गुलाम

मनुष्य की सम्पन्नता या यंत्रो के गुलाम

मनुष्य की सम्पन्नता या यंत्रो के गुलाम

आधुनिक सभ्यता के मानदंड भी बड़े अदभुत है दिन-रात श्रम करके आप अर्थ उपार्जन करते हैं | संपन्नता आते ही सुख सुविधा के लिए अनेक साधन और यंत्र जताते हैं। यह मनुष्य की सम्पन्नता या यंत्रो के गुलाम है।

अपना इन यंत्रों पर आपकी मिल्कियत से दूसरों पर आपका रोव  बढ़ता है,  मिल्कियत के नाम पर आप अपने गुलाम बनकर रह जाते हैं  |  यंत्रों पर आपकी निर्भरता जियो जियो बढ़ती जाती है, त्यों त्यों आप भी यंत्र बन जाते हैं ।  आपके रिश्ते संबंध व्यवहार से मानवता लुप्त हो जाती है और यांत्रिकता बढ़ती जाती है ।

सुविधाएं कम और मुसीबत अधिक बढ़ती जाती है मुसीबतें कम करने के नाम पर आसानी से कोई भी आपको ब्लैकमेल कर सकता है।  आप तो यंत्र बन ही गए हैं इसका अतः आपका आत्म गौरव स्वावलंबन आत्मविश्वास भी मिट चुका होता है।

आप केवल समझौता कर सकते हैं ब्लैकमेलर की तरह हरसंभव मांगे मानते रहना ही आपकी नियति बन जाता है,  आप कोई भी यंत्र इसलिए खरीदते हैं ताकि आपकी सुविधाओं में वृद्धि हो,  यंत्र आपका है यदि आपके यंत्र पर आपका ही नियंत्रण न हो तो कितनी शर्म की बात है परंतु होता प्रतिदिन यही है बिगड़े हुए यंत्रों को सुधारने वाले उनके निश्चित मैकेनिक्स इंजीनियर होते हैं। यंत्र सुधारने की उनकी अपनी शर्तें होती है नखरे होते हैं पारिश्रमिक होता है।

यह शरीर आपका है यह चाहे जब रिजेक्ट कर देने योग्य यंत्र नहीं है।  यंत्र को सुख-दुख नहीं होता,  शरीर को सुख-दुख होता है,  शरीर को यंत्र मत बनाइए।

अपने शरीर का नियंत्रण मेकैनिज्म यदि आप दूसरों को सौंपेंगे तो आपका  स्वामित्य,  स्वतंत्रता गौरव सब नष्ट हो जाएगा।

मनुष्य की सम्पन्नता या यंत्रो के गुलाम

आप भी यंत्र बंद कर रह जाएंगे यंत्र को कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा अनुसार नाचा सकता है और आप भी नाचेंगे यही है गैर जिम्मेदाराना हरकत

अपना काम खुद ही करे।

मनुष्य की सम्पन्नता या यंत्रो के गुलाम

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